9/9/16

एक शहीद बेटे की अपनी माँ के प्रति भावना

शहीद पर कविता
 - एक शहीद बेटे की
 अपनी माँ के प्रति भावना
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शहादत का सेहरा बाँधे, मृत्यु से विवाह रचाता हूँ.
जन्मभूमि की रक्षा खातिर, अपनी भेंट चढ़ाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
मां देख तिरंगा मेरे तन पर, कितना सुंदर खिलता है.
ऐसा कफ़न मेरी मां बस, किस्मतवालो को मिलता है.
देकर समर्पण मातृभूमि को, गर्व से मैंइठलाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
एक अकेले मैने मां,दस-दस को धूल चटाई है.
मैने पीठ दिखाई नही, गोली सीने पर खाई है.
गिरने से पहले शत्रु को, तारे दिनमे दिखलाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
मेरी शहादत को मां तुम, मत आँसू से धो देना.
मरकर भी मैं अमर हुआ, न वीरगति पर रो देना.
देकर साँसे इस मिट्टी को, इसका क़र्ज़चुकाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
ऋणी हूँ तेरा मेरी मां, ऋण तेरा चुका नपाया मैं
तेरे कदमो मे खुशियो की, माला सजा न पाया मैं.
पर भारत मां के चरणो मे, अपनी देह बिछाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
संभव है मां भ्रष्टाचारी, हक शहीदो काभी खा जायें.
कफ़न की कीमत लगे और, ताबूत घोटाले हो जायें.
रहा बीच कुछ मक्कारो के, पर अपना फ़र्ज़ निभाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ.
मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया मे मां लेकिन.
भारत मां का बेटा बनकर, इस दुनिया सेजाता हूँ...!!
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