काव्य प्रभा

  • उपचार और आरोग्य
  • Homeopathic and Ayurvedic medicines
  • घरेलू आयुर्वेद
  • दरजी समाज संदेश
  • भजन सरिता
  • सनातन आध्यात्म,जाति इतिहास ,दान विमर्श

8.11.26

आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं - डॉ. दयाराम आलोक की कविता


                 

    
   


आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं - डॉ. दयाराम आलोक की कालजयी रचना

नक्षत्रों की ज्योति, मेघ का मुक्त हास धरती पर लाएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।

दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं, यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है। जब पूरा संसार जगमग दीपों की चकाचौंध में डूबा होता है, तब कवि की दृष्टि उन अश्रुपूर्ण लोचनों पर भी जाती है, जो वैभव के बीच भी अभाव में जी रहे हैं।

जयपुर के प्रतिष्ठित समाचार पत्र "नवज्योति" में प्रकाशित डॉ. दयाराम आलोक की यह कालजयी रचना हमें केवल बाहर की सुंदरता नहीं, बल्कि अंतर की आँखें खोलने का आह्वान करती है। यह कविता घृणा, ग्लानि और ईर्ष्या को स्नेह, सत्य और समता से धोने का संदेश देती है।

इस रचना में कवि ने दीपावली के सच्चे अर्थ को समझाया है - ऐसा दीप जलाना जिससे किसी मजबूर का दिल न तड़पे, बल्कि बर्बाद हुई खुशियों को नया जीवन मिले। दयानंद और सुकरात जैसे महापुरुषों को दीप बताकर कवि ने इस प्रकाश पर्व को एक शाश्वत सद्भाव का पर्व बना दिया है।

आइए, इस पावन प्रकाश वेला में इस अनुपम रचना का पूर्ण पाठ करते हैं और अपने मन के दर्पण को स्वच्छ बनाते हैं।

पूरी कविता : 

आओ दीप जलाकर...

नक्षत्रों की ज्योति मेघ का मुक्त हास धरती पर लाएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।


युग बीते जग देख रहा है चकाचौंध जगमग दीवाली,
युद्ध द्रश्य है इधर ज्योति और उधर तिमिर मावस मतवाली।
नष्ट करो मालिन्य प्रसारो उज्वलता जगती ने जाना,
शृंगारित घर आंगन गलियां हुआ नयन रंजक वीराना।


अंधियारे के अधिवासों पर आओ दीप शिखा लहराएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।


बाहर की सुन्दरता देखी अब अंतर की आंखे खोलो
घृणा, ग्लानि, ईर्षा, दुर्गुण सब स्नेह, सत्य, समता से धोलो।
दीवाली का रूप हो जिसमें हर अभाव वैभव को छूले,
सम्प्रदाय-विद्वेष, ढोंग और कलुशित वर्ग विषमता भूलें।


यह प्रकाश वेला अति पावन सौहार्द्रिक सद्भाव जगाएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।


ज्योतित जग में आज निहारो अश्रुपूर्ण लोचन कितने हैं,
वैभव के पोषक बेचारे दलित, क्षुधित पंजर कितने हैं।
हम न विचारें ऐसे मसले तब तक यह दीपक मेला है,
विस्फ़ोटक द्रव्यों से मानव खुश किन्तु प्रलय झेला है।


दयानंद, सुकरात दीप हैं जो सदियों तक राह दिखाएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।


तुम मत ऐसे दीप जलाओ जिससे अंधकार उकसाए,
लुत्फ़ उठाना ठीक नहीं जो मजबूरों के दिल तडफ़ाए।
उन्हें मनाने दो दीवाली जिन्हें न खुशियां रास हुई हैं,
उन खुशियों को जीवन दे दो जो खुशियां बर्बाद हुई हैं।


ज्योति पर्व आवाहन करता जन मन दर्पण स्वच्छ बनाएं,
आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं।


नक्षत्रों की ज्योति, मेघ का मुक्त हास धरती पर लाएं...

निष्कर्ष (Conclusion)

डॉ. दयाराम आलोक की यह रचना हमें सिखाती है कि दीपावली का असली अर्थ केवल अपने घर को सजाना नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाना है।

कवि का संदेश स्पष्ट है - जब तक समाज का एक भी व्यक्ति अंधेरे में है, तब तक हमारी दीवाली अधूरी है। हमें ऐसा दीप जलाना है जो नफरत को मिटाए, समता को बढ़ाए और हर मन को सौहार्द से भर दे।

यही इस कविता की कालजयीता है। दशकों बाद भी यह रचना आज उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी नवज्योति में प्रकाशन के समय थी।

इस दीपावली, आइए हम सब मिलकर एक ऐसा दीप जलाएं जो किसी के जीवन में अंधेरा न बढ़ाए, बल्कि मंगलमय सद्पथ दिखलाए।


आपको यह रचना कैसी लगी? कमेंट में अपने विचार अवश्य बताएं और इस संदेश को अपने अपनों तक पहुंचाएं।

लेखक परिचय

डॉ. दयाराम आलोक हिन्दी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि, साहित्यकार और विचारक हैं। उनकी रचनाओं में समाज, मानवता, सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना का गहरा स्वर देखने को मिलता है।

सरल भाषा में गूढ़ दार्शनिक संदेश देना उनकी कविताओं की विशेषता है। उनकी रचनाएं देश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं, जिनमें जयपुर से प्रकाशित "नवज्योति" भी प्रमुख है। डॉ. आलोक की कविताएं पाठकों को केवल आनंद ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का बोध भी कराती हैं।
By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: आओ दीप जलाकर, डॉ. दयाराम आलोक, दीपावली कविता, नवज्योति, हिन्दी कविता
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh

27.6.23

तमने मेरे दिल को पुकारा है लिरिक्स विडियो Singer: Deshbhakt Shamgarh

 


तमने मेरे दिल को पुकारा है 

Song Name : Tum Ko Mere Dil Ne Pukara
Album / Movie : Rafoo Chakkar 1975
Star Cast : Rishi Kapoor, Neetu Singh, Madan Puri, Rajendranath, Paintal
Singer : Harbinder Nerobi  and Dilip Deshbhakt Shamgarh 
Music Director : Jaikishan Dayabhai Panchal, Shankar Singh Raghuvanshi
Lyrics by : Gulshan Bawra (Gulshan Kumar Mehta)





तुमको मेरे दिल ने
तुमको मेरे दिल ने
पुकारा है बड़े नाज़ से
अपनी आवाज़ मिला दो
अपनी आवाज़ मिला दो
मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने
पुकारा है बड़े नाज़ से
अपनी आवाज़ मिला दो
अपनी आवाज़ मिला दो
मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने

मुझको पहली नज़र
में लगा है यूँ
मुझको पहली नज़र
में लगा है यूँ
साथ सदियों पुराना है अपना
और सदियो ही रहना पड़ेगा
तुमको बनके इन
आँखों का सपना
निभाके सनम
अपनी आवाज़ मिला
दो मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने
पुकारा है बड़े नाज़ से
अपनी आवाज़ मिला
दो मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने

प्यार की इन हसीं वादियों में
प्यार की इन हसीं वादियों में
झूम के यु ही मिलते रहेंगे
ज़िन्दगी के दुहने सफर में
हमसफ़र बनके चलते रहेंगे
इस दिल के अरमा जगके सनम
मुझको बाहों की
रहो में लेक सनम
अपनी आवाज़ मिला
दो मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने
पुकारा है बड़े नाज़ से
अपनी आवाज़ मिला
दो मेरी आवाज़ से
तुमको मेरे दिल ने.

यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि


By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: Harbinder Nerobi, tumne mere dil ko pukara hai -Singer Deshbhakt Shamgarh
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh

19.4.23

अरे कहीं देखा है तुमने:जयशंकर प्रसाद







जयशंकर प्रसाद











*************






अरे कहीं देखा है तुमने

मुझे प्यार करने वाले को?

मेरी आँखों में आकर फिर

आँसू बन ढरने वाले को?


सूने नभ में आग जलाकर

यह सुवर्ण-सा हृदय गला कर

जीवन संध्या को नहला कर

रिक्त जलधि भरने वाले को?


रजनी के लघु-लघु तम कन में

जगती की ऊष्मा के वन में

उस पर पड़ते तुहिन सघन में

छिप, मुझसे डरने वाले के?


निष्ठुर खेलों पर जो अपने

रहा देखता सुख के सपने

आज लगा है क्यों वह कँपने                                                                           


By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: अरे कहीं देखा है तुमने, जयशंकर प्रसाद
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh

23.2.23

नर हो, न निराश करो मन को:Maithilisharn gupt







नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को।

संभलो कि सुयोग न जाय चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निराश करो मन को।

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे
मरणोंत्‍तर गुंजित गान रहे
सब जाय अभी पर मान रहे
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो, न निराश करो मन को।

प्रभु ने तुमको कर दान किए
सब वांछित वस्तु विधान किए
तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो
फिर है यह किसका दोष कहो
समझो न अलभ्य किसी धन को
नर हो, न निराश करो मन को।

किस गौरव के तुम योग्य नहीं
कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं
जन हो तुम भी जगदीश्वर के
सब है जिसके अपने घर के
फिर दुर्लभ क्या उसके जन को
नर हो, न निराश करो मन को।

करके विधि वाद न खेद करो
निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो
बनता बस उद्‌यम ही विधि है
मिलती जिससे सुख की निधि है
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।




**पित्ताशय की पथरी (Gallstones) की रामबाण औषधि 

किडनी फेल ,गुर्दे ख़राब की जीवन रक्षक हर्बल औषधि

सायटिका रोग किस औषधि से ठीक होता है?

भारत के  मन्दिरों और मुक्ति धाम हेतु शामगढ़ के समाजसेवी  द्वारा दान की विस्तृत श्रृंखला 

दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के आशु लाभकारी उत्पाद

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब रुकावट की कारगर हर्बल औषधि

गठिया,संधिवात,सायटिका का परमानेंट इलाज 

सेक्स का महारथी बनाने वाले आयुर्वेदिक नुस्खे


आर्थराइटिस(संधिवात),गठियावात ,सायटिका की तुरंत असर हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,किडनी की पथरी की १००% सफल हर्बल औषधि

तिल्ली बढ़ जाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

डॉ.दयाराम आलोक की जीवन गाथा 

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय/sex power

कई बीमारियों से मुक्ति द‍िलाने वाला है गिलोय


स्तनों की कसावट और सुडौल बनाने के उपाय

लीवर रोगों के अचूक हर्बल इलाज

गांधी के अमृत वचन हमें अब याद नहीं - डॉ॰दयाराम आलोक***************

By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: नर हो न निराश करो मन को, Nar ho na nirash karo man ko
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh

2.8.22

काव्य मंजूषा ब्लॉग की 241 रचनाओं की लिंक्स

 


जयशंकर प्रसाद - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.

बालकवि बैरागी - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
काव्य-मंजूषा. कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल ...

कबीर - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label › कबीर
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.
आपका पेज मोबाइल-अनुकूल नहीं है.

सुमित्रानंदन पंत - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.

संतोषानन्द - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label › संतो...
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.
आपका पेज मोबाइल-अनुकूल नहीं है.

ध्वज फहराएंगे - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
काव्य-मंजूषा. कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल ...

श्याम नारायण पाण्डेय - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
काव्य-मंजूषा. कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल ...

सुमन कैसे सौरभीले - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
काव्य-मंजूषा. कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल ...

सूरदास के पद - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल देती है।

वेणु का स्वर - काव्य-मंजूषा

https://kavitalok.blogspot.com › search › label
काव्य-मंजूषा. कविता हमारे मनोभावों को उच्छवासित करके हमारे जीवन में एक नया जीव डाल ...

पेज नेविगेशन

पीछे जाएं12345678910आगे बढ़ें
By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: काव्य मंजूषा ब्लॉग की 241 रचनाओं की लिंक्स
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh

14.7.22

अब जागो जीवन के प्रभात!:Jai Shankar Prasad



अब जागो जीवन के प्रभात!


वसुधा पर ओस बने बिखरे


हिमकन आँसू जो क्षोभ भरे


ऊषा बटोरती अरुण गात!


अब जागो जीवन के प्रभात!


तम-नयनों की ताराएँ सब—


मुँद रही किरण दल में हैं अब,


चल रहा सुखद यह मलय वात!


अब जागो जीवन के प्रभात!


रजनी की लाज समेटो तो,


कलरव से उठ कर भेंटो तो,


अरुणांचल में चल रही बात।


अब जागो जीवन के प्रभात!


यह वासंती शाम हमारे प्रथम मिलन सी सुख प्रद सुन्दर! ऑडियो

पित्ताशय की पथरी (Gallstones) की रामबाण औषधि 

किडनी फेल ,गुर्दे ख़राब की जीवन रक्षक हर्बल औषधि

सायटिका रोग किस औषधि से ठीक होता है?

भारत के  मन्दिरों और मुक्ति धाम हेतु शामगढ़ के समाजसेवी  द्वारा दान की विस्तृत श्रृंखला 

दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के आशु लाभकारी उत्पाद

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब रुकावट की कारगर हर्बल औषधि

गठिया,संधिवात,सायटिका का परमानेंट इलाज 

सेक्स का महारथी बनाने वाले आयुर्वेदिक नुस्खे


आर्थराइटिस(संधिवात),गठियावात ,सायटिका की तुरंत असर हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,किडनी की पथरी की १००% सफल हर्बल औषधि

तिल्ली बढ़ जाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

डॉ.दयाराम आलोक की जीवन गाथा 

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय/sex power

कई बीमारियों से मुक्ति द‍िलाने वाला है गिलोय


स्तनों की कसावट और सुडौल बनाने के उपाय

लीवर रोगों के अचूक हर्बल इलाज

गांधी के अमृत वचन हमें अब याद नहीं - डॉ॰दयाराम आलोक
By Dr.Dayaram Aalok
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: अब जागो जीवन के प्रभात!, jai shankar prasad
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh
पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें संदेश (Atom)

Listen to page

पेज

  • हमारे बारे में - About Us
  • संपर्क करें - Contact Us
  • मुख्यपृष्ठ
  • नियम और शर्तें
  • गोपनीयता नीति - Privacy Policy

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Dr.Dayaram Aalok
Dr.Dayaram Aalok M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London), Blog Writer,caste historian,Poet(kavitalok.blogspot.com),Social worker(damodarjagat.blogspot.com),Herbalist(remedyherb.blogspot.com,healinathome.blogspot.com),Used to organize Mass marriage programs for Darji Community. founder and president Damodar Darji Mahasangh
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें

Translate

पाठक संख्या

कविताओं के लिंक

  • उन्हें मनाने दो दीवाली-- डॉ॰दयाराम आलोक
  • Home
  • प्रकृति की लीला न्यारी -नरेंद्र वर्मा
  • सरहदें बुला रहीं.- डॉ॰दयाराम आलोक
  • विशिष्ट कवियों की चयनित कविताओं की सूची (लिंक्स)
  • जब तक धरती पर अंधकार - डॉ॰दयाराम आलोक
  • मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँ
  • प्रणय-गीत- डॉ॰दयाराम आलोक
  • गांधी के अमृत वचन हमें अब याद नहीं - डॉ॰दयाराम आलोक
  • रात और प्रभात.-डॉ॰दयाराम आलोक
  • सुमन कैसे सौरभीले: डॉ॰दयाराम आलोक
  • हर घड़ी खुद से उलझना मुकद्दर है मेरा
  • धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
  • ओला-मैथिली शरण गुप्त
  • JANUARY 10, 2020 हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा-
  • अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में-पयाम सईदी
  • हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं -पयाम सईदी
  • काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है-पयाम सईदी
  • आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए-पयाम सईदी
  • तेरा चेहरा है आईने जैसा-पयाम सईदी
  • इंतहा आज इश्क़ की कर दी--पयाम सईदी
  • कभी गुंचा कभी शोला -राना सहरी
  • उन्हें मनाने दो दीवाली-- डॉ॰दयाराम आलोक
  • स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से -गोपालदास "नीरज"
  • यात्रा और यात्री - हरिवंशराय बच्चन
  • शक्ति और क्षमा - रामधारी सिंह "दिनकर"
  • आओ आज करें अभिनंदन.- डॉ॰दयाराम आलोक
  • राणा प्रताप की तलवार -श्याम नारायण पाण्डेय
  • वीरों का कैसा हो वसंत - सुभद्राकुमारी चौहान
  • कृष्ण की चेतावनी -रामधारी सिंह "दिनकर"
  • ले चल वहाँ भुलावा देकर - जयशंकर प्रसाद
  • कलम, आज उनकी जय बोल -रामधारी सिंह "दिनकर"
  • आह! वेदना मिली विदाई-जयशंकर प्रसाद
  • सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा-अल्लामा इकबाल
  • अश्रु यह पानी नहीं है-महादेवी वर्मा
  • कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है-- राहुल प्रसाद (महुलिया पलामू)
  • पथहारा वक्तव्य - अशोक वाजपेयी
  • कितने दिन और बचे हैं? - अशोक वाजपेयी
  • राधे राधे श्याम मिला दे -भजन
  • ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
  • हम आपके हैं कौन - बाबुल जो तुमने सिखाया-Ravindra Jain
  • नदिया के पार - जब तक पूरे न हो फेरे सात-Ravidra jain
  • ऐसे हैं सुख सपन हमारे - नरेन्द्र शर्मा
  • अँखियों के झरोखों से - रविन्द्र जैन
  • गंगा, बहती हो क्यूँ - नरेन्द्र शर्मा
  • कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया - साहिर लुधियानवी
  • किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है - साहिर लुधियानवी
  • इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके - साहिर लुधियानवी
  • जब दीप जले आना जब शाम ढले आना - रविन्द्र जैन
  • अब कोई गुलशन ना उजड़े - साहिर लुधियानवी
  • कोशिश करने वालों की हार नहीं होती - सोहनलाल द्विवेदी
  • तुमने मेरी चिर साधों को झंकृत और साकार किया है.- डॉ॰दयाराम आलोक
  • वह देश कौन सा है - रामनरेश त्रिपाठी
  • बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ -महादेवी वर्मा
  • मधुर-मधुर मेरे दीपक जल - महादेवी वर्मा
  • औरत पालने को कलेजा चाहिये - शैल चतुर्वेदी
  • कवि सम्मेलन, टुकड़े-टुकड़े हूटिंग - शैल चतुर्वेदी
  • गांधी की गीता - शैल चतुर्वेदी
  • तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगलसिंह सुमन
  • मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह 'सुमन
  • हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह 'सुमन'
  • जंगल गाथा -अशोक चक्रधर
  • मेमने ने देखे जब गैया के आंसू - अशोक चक्रधर
  • सूरदास के पद
  • यह वासंती शाम -डॉ.आलोक
  • सरहदें बुला रहीं.- डॉ॰दयाराम आलोक
  • घाघ कवि के दोहे -घाघ
  • घाघ कवि के दोहे -घाघ
  • गाढे अंधेरे में , अशोक वाजपेयी
  • मुझको भी राधा बना ले नंदलाल - बालकवि बैरागी
  • बादल राग -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
  • प्रेयसी-सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  • ग्राम नारी - सुमित्रानंदन पंत
  • ग्राम - सुमित्रानंदन पंत
  • जाड़े की धूप - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  • शुभकामनाएँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  • राम की शक्ति पूजा -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
  • साँसो का हिसाब -शिव मंगल सिंग 'सुमन"
  • आत्‍मकथ्‍य - जयशंकर प्रसाद
  • बिहारी कवि के दोहे
  • झुकी कमान -चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  • कबीर की साखियाँ - कबीर
  • गुरु-महिमा - कबीर
  • रात और प्रभात.-डॉ॰दयाराम आलोक
  • भक्ति महिमा के दोहे -कबीर दास
  • लगता नहीं है जी मेरा - ज़फ़र
  • ग़ज़ब किया, तेरे वादे पे ऐतबार किया - दाग़ देहलवी
  • तु कभी थे सूर्य - चंद्रसेन विराट
  • बीती विभावरी जाग री! jai shankar prasad
  • हिमालय के आँगन में - jay shankar prasad
  • हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
  • मैं अमर शहीदों का चारण-श्री कृष्ण सरल
  • हम पंछी उन्मुक्त गगन के -- शिवमंगल सिंह सुमन
  • रश्मिरथी - रामधारी सिंह दिनकर
  • सुदामा चरित - नरोत्तम दास
  • बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम- इंदीवर
  • अरुण यह मधुमय देश हमारा -जय शंकर प्रसाद
  • बन्द करो मधु की ,गोपालदास "नीरज"
  • स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से ,गोपालदास "नीरज"
  • मै ना भूलूँगा, संतोषानन्द
  • सूरज पर प्रतिबंध अनेकों , कुमार विश्वास
  • रहीम के दोहे -रहीम कवि
  • जागो मन के सजग पथिक ओ! , फणीश्वर नाथ रेणु
  • बेटी के घर से लौटना ,चन्द्रकान्त देवताले
  • अब जागो जीवन के प्रभात!,Jai Shankar Prasad

My Websites

  • Homeopathic and Ayurvedic medicines -Dr.Aalok
    Double Vision (Diplopia) - Causes, Symptoms, Types & Top 9 Homeopathic Medicines - What is Diplopia or Double Vision? Diplopia, commonly known as double vision, is a visual complaint where you see two images of a single object instead...
    3 वर्ष पहले
  • आध्यात्म,जाति इतिहास,जनरल नॉलेज
    -
  • उपचार और आरोग्य
    -
  • काव्य मंजूषा
    -
  • घरेलू आयुर्वेद
    -
  • दर्जी समाज संदेश
    -
दिखाएं 5 सभी दिखाएं

विशिष्ट पोस्ट

विशिष्ट कवियों की चयनित कविताओं की सूची (लिंक्स)

विशिष्ट कवियों की चयनित कविताओं की सूची (लिंक्स) काव्य-मंजूषा-kavya manjusha: सरहदें बुला रहीं.- डॉ॰दयाराम आलोक काव्य-मंजूषा-kavya manjush...

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2010 (11)
    • ►  मार्च (7)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  अक्टूबर (3)
  • ►  2016 (20)
    • ►  सितंबर (16)
    • ►  अक्टूबर (4)
  • ►  2017 (4)
    • ►  जून (3)
    • ►  जुलाई (1)
  • ►  2018 (48)
    • ►  दिसंबर (48)
  • ►  2019 (38)
    • ►  जनवरी (12)
    • ►  फ़रवरी (14)
    • ►  मार्च (1)
    • ►  अगस्त (10)
    • ►  अक्टूबर (1)
  • ►  2020 (8)
    • ►  जनवरी (8)
  • ►  2021 (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  दिसंबर (1)
  • ►  2022 (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  अगस्त (1)
  • ►  2023 (3)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  अप्रैल (1)
    • ►  जून (1)
  • ▼  2026 (1)
    • ▼  नवंबर (1)
      • आओ दीप जलाकर जग को मंगलमय सद्पथ दिखलाएं - डॉ. दयार...
  • उर्वशी /रामधारी सिंह 'दिनकर'
     उर्वशी : रामधारी सिंह 'दिनकर' पात्र परिचय पुरुष पुरुरवा: वेदकालीन, प्रतिष्ठानपुर के विक्रमी ऐल राजा, नायक ...
  • स्वतन्त्रता पुकारती - जय शंकर प्रसाद
    Swatantrata Pukarti   स्वतन्त्रता पुकारती  हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती...
  • पंचवटी / मैथिलीशरण गुप्त/ पेज 1 से 6
    पूज्य पिता के सहज सत्य पर, वार सुधाम, धरा, धन को, चले राम, सीता भी उनके, पीछे चलीं गहन वन को। उनके पीछे भी लक्ष्मण थे, कहा राम ने कि ...

सेहत समस्या एवं समाधान

Subscribe to सेहत समस्या एवं समाधान /

Subscribe to सेहत समस्या एवं समाधान //Health Problems and Solutions

लेबल

  • -जय शंकर प्रसाद
  • 'क़मर' मुरादाबादी
  • 1953
  • अँखियों के झरोखों से
  • अँजुरी भर धूप
  • अंधकार से आलोक की यात्रा
  • अज्ञेय
  • अब कोई गुलशन ना उजड़े
  • अब जागो जीवन के प्रभात!
  • अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में-पयाम सईदी
  • अरुण यह मधुमय देश हमारा
  • अरे कहीं देखा है तुमने
  • अलबेलों का मस्तानों का
  • अल्लामा इकबाल
  • अशोक चक्रधर
  • अशोक वाजपेयी
  • अश्रु यह पानी नहीं है
  • आओ आज करें अभिनंदन
  • आओ दीप जलाकर
  • आज उनकी जय बोल - रामधारी सिंह "दिनकर"
  • आत्‍मकथ्‍य
  • आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
  • आह! वेदना मिली विदाई
  • इंतहा आज इश्क़ की कर दी--पयाम सईदी
  • इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
  • उन्हें मनाने दो diwali
  • उर्वशी /रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • ऊंचा मस्तक सदा रहेगा
  • एक शहीद बेटे की अपनी माँ के प्रति भावना
  • ऐसे हैं सुख सपन हमारे
  • ओला-मैथिली शरण गुप्त
  • औरत पालने को कलेजा चाहिये
  • कबीर
  • कबीर की साखियाँ
  • कबीर दास
  • कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
  • कभी गुंचा कभी शोला
  • कलम
  • कवि सम्मेलन टुकड़े-टुकड़े हूटिंग
  • कविता
  • कहना भी ज़रूरी है
  • काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है-पयाम सईदी
  • कामायनी - महाकाव्य -जयशंकर प्रसाद
  • काव्य मंजूषा ब्लॉग की 241 रचनाओं की लिंक्स
  • कितने दिन और बचे हैं?
  • किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है
  • कुछ तो लोग कहेंगे / आनंद बख़्शी
  • कुछ बातें अधूरी हैं
  • कुमार विश्वास
  • कुम्हलाये हैं फूल
  • कृष्ण की चेतावनी
  • कोई दीवाना कहता है (कविता) .कुमार विश्वास
  • कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
  • क्षमा शोभती उस भुजंग को
  • गंगा
  • ग़ज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया
  • गजानन माधव मुक्तिबोध
  • गणतंत्र दिवस
  • गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
  • गांधी की गीता
  • गांधी के अमृत वचन हमें अब याद नहीं
  • गाढे अंधेरे में
  • गुरु-महिमा
  • गोपाल शरण सिंह
  • गोपाल सिंह नेपाली
  • गोपालदास "नीरज"
  • गोपालशरण सिंह
  • ग्राम
  • ग्राम नारी
  • घाघ कवि के दोहे
  • घोर धनुर्धर
  • चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  • चंद्रसेन विराट
  • चढ़ चेतक पर तलवार उठा
  • चन्द्रकान्त देवताले
  • चलते हैं अकेले ही सितारे
  • जंगल गाथा
  • ज़फ़र
  • जब तक पूरे न हो फेरे सात
  • जब दीप जले आना जब शाम ढले आना
  • जय शंकर प्रसाद
  • जयशंकर प्रसाद
  • जागो मन के सजग पथिक ओ!
  • जाड़े की धूप
  • झुकी कमान
  • ठाकुर गोपाल शरण सिंह
  • डॉ . आलोक कि कविता
  • डॉ . आलोक की कविता
  • डॉ. दयाराम आलोक
  • डॉ.आलोक द्वारा 123 विशिष्ट काव्य कृतियों का संगृह
  • डॉ.दयाराम आलोक
  • तुम कभी थे सूर्य
  • तुमने मेरी चिर साधों को
  • तू चंदा मैं चांदनी
  • तू तरुवर मैं शाख रे
  • तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार
  • दाग़ देहलवी
  • दीपक कविता
  • दीपावली कविता
  • दुनिया का सबसे ग़रीब आदमी
  • देशभक्ति कविता
  • धर्मवीर भारती
  • धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
  • ध्वज फहराएंगे
  • नदिया के पार
  • नर हो न निराश करो मन को
  • नरेंद्र वर्मा
  • नरेन्द्र शर्मा
  • नवज्योति
  • निसिदिन बरसत नैन
  • नौजवाँ बढ़े चलो
  • पंचवटी / मैथिलीशरण गुप्त
  • पंचवटी/मैथिली शरण गुप्त/पृष्ठ 7 से13
  • पथहारा वक्तव्य
  • पाखण्ड मत करो केवल सूत कताई का
  • प्रकृति की लीला न्यारी
  • प्रणय-गीत
  • प्रथम मिलन सी
  • प्रथम रश्मि
  • प्रिय प्रवास -अयोध्या सिंह उपाध्याय "हरिओध"
  • प्रेयसी
  • प्रेरणादायक कविता
  • फणीश्वर नाथ रेणु
  • फिल्म नागपंचमी
  • फूलों पर कविता
  • बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम- इंदीवर
  • बन्द करो मधु की
  • बहती हो क्यूँ
  • बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगा
  • बादल राग
  • बाबुल जो तुमने सिखाया
  • बाबुल तुम बगिया के तरुवर
  • बालकवि बैरागी
  • बावरा अहेरी (कविता)
  • बिहारी कवि के दोहे
  • बीती विभावरी जाग री!
  • बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ
  • बे-नकाब उन की जफाओं को किया है मैंने
  • बेटी के घर से लौटना
  • भक्ति महिमा के दोहे
  • भजन
  • मज़दूरों का गीत
  • मधुकर! स्याम हमारे चोर
  • मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
  • महादेवी वर्मा
  • मातृभूमि सम्मान
  • मुझको भी राधा बना ले नंदलाल
  • मुझे अकेला ही रहने दो
  • मुरझाया फूल - महादेवी वर्मा
  • मेमने ने देखे जब गैया के आंसू
  • मेरा धन है स्वाधीन क़लम
  • मेरी चुनरी उड़ाए लियो जाए
  • मै ना भूलूँगा
  • मैं अमर शहीदों का चारण
  • मैं आता रहूँगा तुम्हारे लिए
  • मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ
  • मैं हूँ अपराधी किस प्रकार?
  • मोहब्बत का जहाँ है और मैं हूँ
  • यह दिया बुझे नहीं
  • यह वासंती शाम
  • यात्रा और यात्री
  • ये देश है वीर जवानों का
  • रविन्द्र जैन
  • रश्मिरथी - रामधारी सिंह दिनकर
  • रहीम कवि
  • रहीम के दोहे
  • राणा प्रताप
  • राणा प्रताप की तलवार
  • रात
  • रात और प्रभात
  • रात भयानक अंधकार है
  • राधे राधे
  • राधे राधे श्याम मिला दे
  • राना सहरी
  • राम की शक्ति पूजा
  • रामधारी सिंह "दिनकर"
  • रामनरेश त्रिपाठी
  • राहुल प्रसाद (महुलिया पलामू)
  • लगता नहीं है जी मेरा
  • लहर कविता-जय शंकर प्रसाद
  • ले चल वहाँ भुलावा देकर
  • वह चिड़िया जो . केदारनाथ अग्रवाल
  • वह देश कौन सा है
  • वीरों का कैसा हो वसंत
  • वे मुसकाते फूल
  • शक्ति और क्षमा
  • शांति रहे पर क्रांति रहे
  • शिव मंगल सिंग 'सुमन"
  • शिवमंगल सिंह 'सुमन
  • शिवमंगल सिंह 'सुमन'
  • शिवमंगल सिंह सुमन
  • शिवमंगलसिंह सुमन
  • शिवाजी
  • शुभकामनाएँ
  • शैल चतुर्वेदी
  • श्याम नारायण पाण्डेय
  • श्री कृष्ण सरल
  • संतोषानन्द
  • सरहदें बुला रहीं
  • सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
  • साँस चलती है तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर!
  • साँसो का हिसाब
  • सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा
  • साहिर लुधियानवी
  • सुदामा चरित - नरोत्तम दास
  • सुभद्राकुमारी चौहान
  • सुमन कैसे सौरभीले
  • सुमित्रानंदन पंत
  • सूरज पर प्रतिबंध अनेकों
  • सूरदास के पद
  • सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
  • सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  • सैनिकों को प्रेरणा कविता
  • सोहनलाल द्विवेदी
  • स्वतन्त्रता दिवस
  • स्वप्न झरे फूल से मीत चुभे शूल से
  • हम आपके हैं कौन
  • हम तुम गीत प्रणय के गाएं
  • हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं -पयाम सईदी
  • हम पंछी उन्मुक्त गगन के
  • हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
  • हर सिंगार यंग पुलकित
  • हरिवंशराय बच्चन
  • हिन्दी कविता
  • हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
  • हिमालय के आँगन में
  • Dayaram Alok poem
  • Deep jalata jauga kavita
  • deepavali rachana
  • diwali kavita
  • Diwali poem Hindi
  • Dr.Aalok kavita
  • Genda Phool Kavita
  • Harbinder Nerobi
  • Jab tak dharti par andhkar
  • jai shankar prasad
  • jaishankar prasad
  • Kamal Par Kavita
  • Mitti ki Mahima By Shivmangal Singh Suman | मिट्टी की महिमा | शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
  • Nar ho na nirash karo man ko
  • panchvati poem -Maithili Sharan Gupt पंचवटी कविता - मैथिली शरण गुप्त
  • poems of Dr.dayaram Aalok
  • Swatantrata Pukarti स्वतन्त्रता पुकारती जय शंकर प्रसाद का व्यक्तित्व व कृतित्व
  • tumne mere dil ko pukara hai -Singer Deshbhakt Shamgarh
  • unhen manane do diwali

आध्यात्म,साहित्य,इतिहास,सामान्य ज्ञान

Subscribe to आध्यात्म,साहित्य,इतिहास,सामान्य ज्ञान

merrymoonmary के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.