30/3/19

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है-- राहुल प्रसाद (महुलिया पलामू)

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,
बिछड़ना मजबूरी था, मिलना भी ज़रूरी है।


आज सुन भी जाओ, ये फलसफा जो मजबूरी है,
दिल तोड़ना फिर सिलना, ये कैसी फितूरी है।


दिल के बंजर पड़े दीवार में, इश्क की बूंदें पड़ना ज़रूरी है,
धड़कन रुक न जाए कहीं, ये सांसों को समझना भी ज़रूरी है।


नहीं संभालता ये इश्क़ अब, टूटकर बाहों में बिखरना ज़रूरी है,
तुम समेट लो बाहों में हमें, इश्क की यही दस्तूरी है।

जो बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,
हां दूर रहना मजबूरी है, दिल लगना भी ज़रूरी है।


मिलना है तुझसे खुद को खोने से पहले, आज गले लगना ज़रूरी है,
यादों में ही टूटकर जीना है अब, ये जो जीवन अधूरी है।


नहीं रुकता सिलसिला दर्द का, अश्क को गिरना भी ज़रूरी है,
फिर से अश्क को दिल के दरिया में संभालना, ये कैसी मजबूरी है।


तुम पास आ जाओ, ये धड़कन सुनना भी ज़रूरी है,
मन की जो प्रीत अधूरी है, प्रीत की रीत करना जो पूरी है।

तेरे लबों से खुशबू चुराके, तेरी दिल की धड़कनों को बढ़ाना भी ज़रूरी है,
आओ प्यास बुझा जाए, ये जो वर्षों की दूरी है, हां जो मिलन अधूरी है।


कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है,
हां दूर रहना मजबूरी है, तो दिल लगना भी ज़रूरी है।


मेरी सामाजिक कहानी 

22/2/19

पथहारा वक्तव्य - अशोक वाजपेयी


हमें पता था
कि खाली हाथ और टूटे हथियार लिए
शिविर में लौटना होगा:
यह भी कि हम जैसे लोग
कभी जीत नहीं पाए-
वे या तो हारते हैं
या खेत रहते हैं-
हम सिर्फ बचे हुए हैं
इस शर्म से कि हमने चुप्पी नहीं साधी,
कि हमने मोर्चा सम्हालने से पहले या हारने के बाद
न तो समर्पण किया, न समझौता:
हम लड़े, हारे और बचे भर हैं!
यह कोई वीरगाथा नहीं है:
इतिहास विजय की कथाएं कहता है,
उसमें प्रतिरोध और पराजय के लिए जगह नहीं होती।
लोग हमारी मूढ़ता पर हंसते हैं-
हमेशा की तरह
वे विजेताओं के जुलूस में
उत्साह से शामिल हैं-
हम भी इस भ्रम से मुक्त होने की कोशिश में हैं
कि हमने अलग से कोई साहस दिखाया:
हम तो कविता और अंत:करण के पाले में रहे
जो आदिकाल से युद्धरत हैं, रहेंगे!
हम पथहारे हैं
पर पथ हमसे कहीं आगे जाता है।

कितने दिन और बचे हैं? - अशोक वाजपेयी


कोई नहीं जानता कि
कितने दिन और बचे हैं?

चोंच में दाने दबाए
अपने घोंसले की ओर
उड़ती चिड़िया कब सुस्ताने बैठ जाएगी
बिजली के एक तार पर और
आल्हाद से झूलकर छू लेगी दूसरा तार भी।

वनखंडी में
आहिस्ता-आहिस्ता एक पगडंडी पार करता
कीड़ा आ जाएगा
सूखी लकड़ियाँ बीनती
बुढ़िया की फटी चप्पल के तले।

रेल के इंजन से निकलती
चिनगारी तेज़ हवा में उड़कर
चिपक जाएगी
एक डाल पर बैठी प्रसन्न तितली से।

कोई नहीं जानता कि
किनता समय और बचा है
प्रतीक्षा करने का
कि प्रेम आएगा एक पैकेट में डाक से,
कि थोड़ी देर और बाक़ी है
कटहल का अचार खाने लायक होने में,
कि पृथ्वी को फिर एक बार
हरा होने और आकाश को फिर दयालु और
उसे फिर विगलित होने में
अभी थोड़ा-सा समय और है।

दस्तक होगी दरवाज़े पर
और वह कहेगी कि
चलो, तुम्हारा समय हो चुका।
कोई नहीं जानता कि
कितना समय और बचा है,
मेरा या तुम्हारा।

वह आएगी –
जैसे आती है धूप
जैसे बरसता है मेघ
जैसे खिलखिलाती है
एक नन्हीं बच्ची
जैसे अंधेरे में भयातुर होता है
ख़ाली घर।
वह आएगी ज़रूर,
पर उसके आने के लिए
कितने दिन और बचे है
कोई नहीं जानता।

21/2/19

राधे राधे श्याम मिला दे -भजन

राधे राधे , राधे राधे ,
राधे राधे , राधे राधे


राधे राधे, श्याम मिला दे
जय हो
राधे राधे, श्याम मिला दे

गोवर्धन में, राधे राधे
वृन्दावन में, राधे राधे
कुसुम सरोवर, राधे राधे
हरा कुन्ज में, राधे राधे
गोवर्धन में, राधे राधे
पीली पोखर, राधे राधे


मथुरा जी में, राधे राधे
वृन्दावन में, राधे राधे
कुन्ज कुन्ज में, राधे राधे
पात पात में, राधे राधे
डाल डाल में, राधे राधे
वृक्ष वृक्ष में , राधे राधे
हर आश्रम में, राधे राधे

माता बोले, राधे राधे
बहना बोले, राधे राधे
भाई बोले, राधे राधे
सब मिल बोलो, राधे राधे

राधे राधे,राधे राधे
राधे राधे, श्याम मिला दे

अरे
मथुरा जी में, राधे राधे
वृन्दावन में, राधे राधे
पीली पोखर , राधे राधे
गोवर्धन में, राधे राधे
सब मिल बोलो, राधे राधे
प्रेम से बोलो, राधे राधे
सब मिल बोलो, राधे राधे
अरे बोलो बोलो, राधे राधे
अरे गाओ गाओ, राधे राधे
सब मिल गाओ, राधे राधे
प्रेम से बोलो, राधे राधे
सब मिल बोलो, राधे राधे
जोर से बोलो, राधे राधे

राधे राधे,राधे राधे
राधे राधे, श्याम मिला दे





18/2/19

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का-sahir ludhiyanavi

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना

यहाँ चौड़ी छाती वीरों की, यहाँ भोली शक्लें हीरों की
यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में, मचती में धूमें बस्ती में

पेड़ों में बहारें झूलों की, राहों में कतारें फूलों की
यहाँ हँसता है सावन बालों में, खिलती हैं कलियाँ गालों में

कहीं दंगल शोख जवानों के, कहीं करतब तीर कमानों के
यहाँ नित नित मेले सजते हैं, नित ढोल और ताशे बजते हैं

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम, दुश्मन के लिये तलवार हैं हम
मैदां में अगर हम डट जाएं, मुश्किल है कि पीछे हट जाएं





12/2/19

हम आपके हैं कौन - बाबुल जो तुमने सिखाया-Ravindra Jain


बाबुल जो तुमने सिखाया, जो तुमसे पाया
सजन घर ले चली, सजन घर मैं चली

यादों के लेकर साये, चली घर पराये, तुम्हारी लाड़ली
कैसे भूल पाऊँगी मैं बाबा, सुनी जो तुमसे कहानियाँ
छोड़ चली आँगन में मइया, बचपन की निशानियाँ
सुन मेरी प्यारी बहना, सजाये रहना, ये बाबुल की गली
सजन घर मैं चली ...

बन गया परदेस घर जन्म का, मिली है दुनिया मुझे नयी
नाम जो पिया से मैं ने जोड़ा, नये रिश्तों से बँध गयी
मेरे ससुर जी पिता हैं, पति देवता हैं, देवर छवि कृष्ण की
सजन घर मैं चली ...









नदिया के पार - जब तक पूरे न हो फेरे सात-Ravidra jain





जब तक पूरे न हों फेरे सात
तब तक दुल्हिन नहीं दुल्हा की
तब तक बबुनी नहीं बबुआ की

अबही तो बबुआ पहली भँवर पड़ी है
अभी तो पहुना दिल्ली दूर खड़ी है
पहली भँवर पड़ी है,दिल्ली दूर खड़ी है
करनी होगी तपस्या सारी रात
सात फेरे सात जन्मों का साथ...

जैसे जैसे भँवर पड़े मन अंगना को छोड़े
एक एक भाँवर नाता अन्जानों से जोड़े
घर अंगना को छोड़े, नाता अन्जानों से जोड़े
सुख की बदरी आंसू की बरसात
सात फेरे सात जन्मों का साथ...

सात फेरे धरो बबुआ भरो सात वचन जी
ऐसे कन्या कैसे अर्पण कर दे तन भी मन भी
उठो उठो बबुनी देखो ध्रुव तारा
ध्रुव तारे सा हो अमर सुहाग तिहारा
ओ देखो देखो ध्रुव तारा, अमर सुहाग तिहारा
सातों फेरे सातों जन्मों का साथ...