11/9/16

गीत नही गाता हूँ - अटल बिहारी वाजपेयी


Sung by Padmaja Phenany
कवि (Kavi – Poet) : अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee)


बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ ।
गीत नही गाता हूँ ।
Faces are unmasked,
the stains are very deep,
the magic is breaking, today I fear from the truth.
(I) don’t sing a song.
लगी कुछ ऐसी नज़र,
 


बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ।
गीत नहीं गाता हूँ।
the evil has been cast,
and this glass like city has scattered,
not able to mingle in the union of dear ones.
(I) don’t sing a song.
पीठ मे छुरी सा चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ।
गीत नहीं गाता हूँ।
moon is stabbed like a knife in the back,
gone to the direction by crossing the line,
get bound every time in the moments of nirvana.

(I) don’t sing a song.


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