08 सितंबर 2016

नाच रे मयूरा!- पं नरेंद्र शर्मा


नाच रे मयूरा!
खोल कर सहस्त्र नयन,
देख सघन गगन मगन
देख सरस स्वप्न, जो कि
आज हुआ पूरा!
नाच रे मयूरा!
गूँजे दिशि-दिशि मृदंग,
प्रतिपल नव राग-रंग,



रिमझिम के सरगम पर
छिड़े तानपूरा!
नाच रे मयूरा!
सम पर सम, सा पर सा,
उमड़-घुमड़ घन बरसा,
सागर का सजल गान
क्यों रहे अधूरा?
नाच रे मयूरा!

- पं नरेंद्र शर्मा

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